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pal chhin pal chhin the moments of life tuesday april 14 2015 मेरे टूटे हुए ख़्वाबों के सिवा भी हैं जहाँ मेरे टूटे हुए ख़्वाबों के सिवा भी हैं जहाँ तेरे रूठे हुए आशिक़ से अलग लोग भी हैं मेरे नाकाम मुक़द्दर से बड़े दर्द कई तेरे तन्हाई के ज़ख़्मों से जुदा रोग भी हैं कहीं इक माँ ने हैं थामे हुए सैलाब कई के शहादत का मेरे लाल की अपमान न हो कहीं उस बाप ने बेटी की जली लाश सही जो विदाई पे ये कहता था परेशान न हो कहीं कोई है जो घर जाने से घबराए है यूं न हों जागे हुए बच्चे न दो रोटी को कहें कहीं सूखे हुए खेतों पे किसानों के जिस्म न मग़र आँख कोई नम के यूं पानी न बहे कहीं मुस्लिम के कटे हाथ पे राखी भी मिली किसी हिंदू के जले घर में मुसलमान भी था कहीं उस दूधमुंही जान के टुकड़े भी मिले जिसे ये भी नहीं मालूम वो इंसान भी था कहीं छुटकी है उलझती हुई झाड़ू से उधर है यही डर के बची धूल तो फिर ख़ैर नहीं कहीं छोटू है इधर चाय के प्याले पकड़े कई मीलों का सफ़र रोज़ है पर सैर नहीं तेरे ग़म से भरे दिन की भी भली सूरत है मेरी वीरान सी रातों के भी चेहरे हैं जवां तेरे रूठे हुए आशिक़ से अलग लोग भी हैं मेरे टूटे हुए ख़्वाबों के सिवा भी हैं जहाँ posted by aditya at 4 14 2015 12 40 00 am 9 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest wednesday may 1 2013 आज फिर आँख भर गई होगी आज फिर आँख भर गई होगी उसको मेरी ख़बर गई होगी मेरी यांदों की धूल में लिपटी हाय कैसे वो घर गई होगी रात ख़्वाबों में देख कर मुझको सोते सोते संवर गई होगी बारहा बेहया सवालों से जीते जी फिर से मर गई होगी इक तरफ़ प्यार इक तरफ़ रस्में नंगे पांवों गुज़र गई होगी अश्क़ पीकर नज़र झुका कर के सबके दिल में उतर गई होगी चाय की प्यालियां संभाले ख़ुद होके टुकड़े बिखर गई होगी कहते कहते कबूल है क़ाज़ी रहते रहते मुक़र गई होगी posted by aditya at 5 01 2013 01 21 00 pm 15 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest sunday april 28 2013 ये ख़लिश दिल से क्यूं नहीं जाती ये ख़लिश दिल से क्यूं नहीं जाती रूह आराम क्यूं नहीं पाती है कोई मर्ज़ या कयामत है दवा कोई दुआ नहीं भाती बड़ी मुश्क़िल से बड़ी महनत से हुई नफ़रत हमें मुहब्बत से ये बला कौन आ पड़ी है गले नींद अब के ये क्यूं नहीं आती कल तलक तो सकून देती थी यही रग रग को ख़ून देती थी है ख़फ़ा या है बेवफ़ा मुझसे आज मय क्यूं असर नहीं लाती न कोई आरज़ू अधूरी है न कोई पास है न दूरी है ख़्वाहिशें कब की मार दीं सारी आस ए दिल क्यूं ज़हर नहीं खाती ये ख़लिश दिल से क्यूं नहीं जाती दवा कोई दुआ नहीं भाती है कोई मर्ज़ या कयामत है रूह आराम क्यूं नहीं पाती posted by aditya at 4 28 2013 11 35 00 pm 7 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest friday november 9 2012 इश्क़ करने का बहाना मांगिए इश्क़ क्या क्यूं कब कहां कैसे वजा ना मांगिए मांगिए तो इश्क़ करने का बहाना मांगिए ज़िंदगी कट जाएगी चैन ओ सुकूं से आपकी इक बड़े से दिल में कोने का ठिकाना मांगिए कामयाबी ख़ुद चली आएगी चलिए तो सही घर की दीवारों से मंज़िल का पता ना मांगिए है नई शै की चमक बस तब तलक जब तक नई उम्र भर रौनक की ख़ातिर कुछ पुराना मांगिए आपने कल चाँद मांगा हमने वो भी ला दिया पर ख़ुदा के वास्ते हमसे ख़ुदा ना मांगिए इश्क़ हमको आपसे है था रहेगा भी सदा पर सनम ताज़ा मुहब्बत का मज़ा ना मांगिए मौत भी जिसको सुने तो सर झुकाए शर्म से ज़िंदगी के इस सफ़र से वो फ़साना मांगिए ग़र ये अंदाज़ ए बयां लगता है अच्छा आपको आप घायल के लिए ग़म का ख़ज़ाना मांगिए वजा वजह शै object posted by aditya at 11 09 2012 06 55 00 pm 18 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest thursday october 25 2012 गठरी तुम्हारे साथ गुज़रे वक़्त की यादों भरी गठरी बड़ा लालच दिलाती है मैं अक्सर रुक नहीं पाता ज़रा सी गाँठ ढीली कर पकड़ लेता हूं पल कोई कभी जब खोलता हूं मैं बंधी मुट्ठी तो इक रंगीन सी तितली चमकते पंख फ़ैलाए मेरे कमरे में सतरंगी उजाला छोड़ जाती है तुम्हारी झील सी आँखें तुम्हारी रात सी ज़ुल्फ़ें तुम्हारा चाँद सा चेहरा तुम्हारे मुस्कुराते लब मेरी बेरंग सी दुनिया में रंगत फूंक देते हैं कभी ये हाथ गठरी से निकलने भी नहीं पाता हथेली झनझनाती है लहर सी दौड़ जाती है सपोला एक ज़हरीला मुसलसल वार करता है जलन का जिस्म की हर तह तलक एहसास होता है पलक गिरने सी लगती हैं ये धड़कन थम सी जाती है तो सांसें फड़फड़ाती हैं मेरी बेरंग सी दुनिया में अन्धेरा सा छाता है मैं तितली को अगर हाथों में भर लूं कैद कर लूं तो वहीं दम तोड़ देती है अगर आज़ाद रहने दूं तो उड़ के भाग जाती है वो रंगत लौट जाती है सपोला सरसराता जा के छुप जाता है कोने में कभी ढूंढे नहीं मिलता कभी मारे नहीं मरता कई हफ़्तों तलक सूजन बनी रहती है आँखों मे कई दिन की तड़प के सामने कुछ पल की रौनक है मगर मैं रुक नहीं पाता ज़रा सी गाँठ ढीली कर पकड़ लेता हूं पल कोई तेरी यादों की गठरी से बहरः हज़ज 1222 posted by aditya at 10 25 2012 06 43 00 pm 9 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest sunday august 19 2012 और बात है दिल में है और कुछ ज़बां पे और बात है बन आई है जो मेरी जां पे और बात है हाँ आज लिख रहा हूं काग़ज़ों पे हाल ए दिल इक दिन लिखूंगा आसमां पे और बात है ताज़ा है ज़ख़्म दुख रहा है रो रहा हूं मैं कल मुस्कुराऊंगा निशां पे और बात है सारे जहां को है ख़बर वो ठग रहा मुझे मुझको यकीं है बेइमां पे और बात है मालूम है नहीं तुम्हारे दिल में मैं मग़र जी जाऊंगा फ़क़त ग़ुमां पे और बात है मुझको ज़हन से दिल से तो चलो मिटा लिया पर नाम है जो दास्तां पे और बात है हर ओर हो रहीं है बरकतों की बारिशें बस छोड़ कर मेरे मकां पे और बात है है एक सा समां यहां वहां इधर उधर तुम ले चलो मुझे जहां पे और बात है घायल पढ़े कोई अग़र तो बात और है जो ग़ौर दे अग़र बयां पे और बात है posted by aditya at 8 19 2012 03 13 00 pm 4 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest thursday august 16 2012 तुम्हारी ही तो ज़िद थी इश्क़ मेरा आज़माओगे सनम ग़र तुम क़दम इस राह पर यूंही बढ़ाओगे भरोसा इश्क़ से सारे ज़माने का उठाओगे ख़ुदा हद बेवफ़ाई की बना सकता तो था लेकिन उसे मालूम था क्या फ़ायदा तुम पार जाओगे वो सारे ख़त सभी तोह्फ़े जला डाले हैं चुन चुन कर मुझे दोगे रिहाई कब मेरा दिल कब जलाओगे यही क्या कम करम है रोज़ तुम ख़्वाबो में आते हो अब उस पर ये रहम कि और की बाहों मे आओगे अभी तुम हो जवां गिनते हो आशिक़ उंगलियों पे तुम हुस्न जब साथ छोड़ेगा तो हक़ किसपे जमाओगे नया महबूब बोलेगा कि बोलो इश्क है उससे करोगे क्या लबों पे जब मेरा ही नाम पाओगे कभी चारो तरफ़ होंगे हज़ारो चाहने वाले मग़र नज़रें मुझे ढूंढेंगी तो कैसे छुपाओगे अभी तक नींद से उठते हो मेरा नाम ले लेकर मग़र कहते हो तुम तो मान लेता हूं भुलाओगे कभी ग़र ज़िदगी के मोड़ पर फिर से मिले हम तुम तो अनदेखा करोगे या गले मुझको लगाओगे मेरे मरने पे रोना था अगर तो सोचते पहले तुम्हारी ही तो ज़िद थी इश्क़ मेरा आज़माओगे posted by aditya at 8 16 2012 06 37 00 pm 7 comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest older posts home subscribe to posts atom followers facebook blog archive 2015 1 april 1 मेरे टूटे हुए ख़्वाबों के सिवा भी हैं जहाँ 2013 2 may 1 april 1 2012 37 november 1 october 1 august 3 july 2 june 2 may 3 april 3 march 2 february 8 january 12 2011 100 december 11 november 10 october 4 september 7 august 2 july 6 june 6 may 12 april 8 march 10 february 24 about me aditya कोई शायर है या पागल है दिवाना है कोई ये जिसका नाम है घायल ये वाक़ई क्या है view my complete profile license this work is licensed under a creative commons attribution noncommercial noderivs 2 5 india license total pageviews obo visit open books online best blogs of india blogadda blogaddarating hamaari vaani indli bloggers fun and learns feedjit feedjit live blog stats picture window theme 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