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description= Witness What Happens When A Ghalib Loving Psychologist Who Doubles As A Hindi Kaviyatri And Raconteur Sits Down Over A Cup Of Coffee And Coelho By Her Side To Converse About Art, Love, Faith, Philosophy And The Journey Called Life! You re Invited!;
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re invited मघा नक्षत्र august 17 2026 rekha sahay 1 comment 27 नक्षत्रों में मघा 10वां नक्षत्र है जिसका संबंध सीधे हमारे पितरों पूर्वजों से माना गया है इस नक्षत्र का स्वामी केतु है लेकिन इसके अधिपति देवता पितर हैं सूर्य के मघा नक्षत्र में आते ही मानसून का सबसे मुख्य और पवित्र काल शुरू होता है मघा का पानी 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 मघा नक्षत्र रहेगा प्रसिद्ध लोक कहावत मघा के बरसे माता के परसे जिस तरह माँ अपने हाथों से प्रेमपूर्वक खाना परोसकर बच्चे को तृप्त करती है ठीक उसी तरह मघा नक्षत्र की बारिश पूरी धरती और फसलों को तृप्त कर देती है अमृत जल पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मघा की बारिश में एक प्राकृतिक शीतलता और ऊर्जा होती है लोक परंपराओं में इस जल को साफ बर्तन या कपड़े से छानकर संचित किया जाता है और पूरे वर्ष शुभ कार्यों के लिए रखा जाता है पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्यदेव मघा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तब सभी पितर पूर्वज सूक्ष्म रूप में अपने वंशजों को आशीर्वाद देने और धरती की स्थिति देखने आते हैं एक पौराणिक कथा के अनुसार जब इंद्रदेव ने देवताओं की तृप्ति के लिए अमृत की वर्षा की योजना बनाई तब पितरों ने भी पृथ्वी के समस्त जीवों की भलाई के लिए आशीर्वाद दिया इसीलिए मघा नक्षत्र में होने वाली वर्षा की प्रत्येक बूंद को पितरों के सीधे आशीर्वाद के समान माना जाता है मान्यता है कि इस समय होने वाली वर्षा से फसलों में कीट नहीं लगते भूमि की उर्वरकता बढ़ती है और इस जल के स्पर्श मात्र से जीवन में सुख समृद्धि तथा शांति आती है rate this share this share on facebook opens in new window facebook more share on pinterest opens in new window pinterest share on tumblr opens in new window tumblr share on linkedin opens in new window linkedin share on reddit opens in new window reddit share on x opens in new window x share on telegram opens in new window telegram like loading posted in the cornucopia सृजन के स्वर august 16 2026 august 16 2026 rekha sahay leave a comment सृजन जन्म लेती रहती है ख़ामोशी अंतर्मन और तम में रोशनी से दूर रोशनी की ओर जागने की जद्दोजहद शुरू होती है रूह की गर्भस्थ शिशु की कलाकार के कला की हीरा बनने की या धरा में दबे बीज की सुन खामोश सृजन के स्वर rate 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तृष्णा सुकून को मृगतृष्णा बना देती है इंसान भूल जाता है सफ़र ए ज़िंदगी कोई जंग नहीं बल्कि वह रूहानी सफ़र है जो हर अनुभव से हर ज़ख्म से हमें तराशता है ताकि हम ख़ुद को ख़ुद से बेहतर बना सके ताकि सुकून से भरे रौशन वजूद के साथ जीवन के अगले मुकाम का इस्तक़बाल कर सके आप सभी से अनुरोध है कि कृपया नीचे दिए गए लिंक पर जाकर किंडल kindle पर पूरी पत्रिका पढ़ें और अपना प्यार एवं आशीर्वाद दें kindle पर पूरी पत्रिका पढ़ें सधन्यवाद व स्नेह डॉ रेखा रानी rate this share this share on facebook opens in new window facebook more share on pinterest opens in new window pinterest share on tumblr opens in new window tumblr share on linkedin opens in new window linkedin share on reddit opens in new window reddit share on x opens in new window x share on telegram opens in new window telegram like loading posted in the cornucopia tagged amazonbooks amazonkindle ankahealfaz artofwriting atripttrishna besthindipoems bibliophile bookrecommendation bookstagramindia bookworm contentcreator creativewriting deepthoughts desireads dilkibaat feelings hindiauthor hindiblogger hindikavita hindilines hindiliteraturelove hindipoetry hindiquotes hindireaders hindisahitya hindivichar hindiwriters humandesires indianauthors indianpoets innerpeace inspirationalquotes kavisammelan kavitakosh kavyagoshti kindlebooks kindleindia lifequotes lifestruggles lifetruths literarymagazine literaturelover mindfulness motivationalpoetry mustread narishakti newrelease philosophicalpoetry poemoftheday poetrycollection poetrycommunity poetryislife poetrylovers poetsofinstagram pratigyanmagazine publishedauthor readersofindia readmore rekharani sahitya selfdiscovery soulfulwords spiritualjourney struggleoflife successjourney supportwriters suvichar thirstforpeace thoughtoftheday trendingpoetry viralpoetry womenwriters wordporn wordsmith writersofindia zindagi desires emotions kavita literature पलाश की कहानी august 11 2026 august 11 2026 rekha sahay 2 comments पतझड़ की धूप में सुलगती इक इबादत है पलाश के सुर्ख फूलों में रब की नजाकत है जमीं पर आसमानी आग मंजर सा नजर आता है ये जंगल की खामोशी में कविता एक सुनाता है नोट मेरा एक आर्टिकल पलाश एनडीटीवी इंडिया में पब्लिश हुआ है उस आर्टिकल को लिखने के दौरान इकट्ठे किए गए सभी जानकारी को कंपाइल कर यह आर्टिकल लिखा गया है शब्द सीमा होने के कारण बहुत सी जानकारियां इसमें शामिल नहीं जा सकी जो इस आर्टिकल में लिखी गई है आशा है पाठक इसे भी पढ़ कर सराहेंगे जंगल ज्वाला पलाश जिसे जंगल की आग flame of the forest कहा जाता है भारतीय प्रकृति और संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है पलाश जंगल की सुलगती गर्मी और प्रकृति का सुर्ख पैगाम है जब बसंत की दस्तक होती है तब कुदरत भारतीय जंगलों के कैनवास पर एक ऐसा रंग बिखेरता है जो आँखों और रूह को सुकून देती है यह रंग है पलाश का इसे केवल एक फूल नहीं टहनियों पर खिली हुई वह कविता है जिसे तपते मौसम का गर्द भी धुंधला नहीं कर पाता पलाश butea monosperma का खिलना महज़ एक मौसमी बदलाव नहीं बल्कि जीवन के उस फलसफे का प्रतीक है जहाँ खाक व गर्मी से भी खूबसूरती जन्म लेती है पलाश का अस्तित्व वानस्पतिक और भौगोलिक परिचय पलाश को वानस्पतिक विज्ञान की भाषा में ब्यूटिया मोनोस्पर्मा butea monosperma कहा जाता है यह फैबेसी fabaceae परिवार का सदस्य है इसके कई नाम इसके चरित्र की गवाही देते हैं ढाक इसके पत्तों की बनावट और सघनता के कारण टेसू इसके फूलों की मनमोहक रंग व छटा के कारण केसू विशेषकर पंजाब और उत्तर भारत के क्षेत्रों में बनावट और संरचना पलाश का पेड़ मध्यम ऊंचाई का होता है इसके पत्ते त्रिपक्षीय trifoliate होते हैं यानी एक ही डंठल पर तीन पत्ते इन पत्तों के बारे में एक प्रसिद्ध मुहावरा भी है ढाक के तीन पात जो किसी चीज़ की स्थिरता या अपरिवर्तनीय स्थिति को दर्शाता है पलाश के फूल बिना किसी खुशबू के होते हैं लेकिन उनका गहरा केसरिया लाल सुर्ख रंग इतना प्रभावी होता है कि दूर से देखने पर ऐसा भ्रम होता है जैसे जंगल में आग लग गई हो इसीलिए इसे अंग्रेज़ी में flame of the forest कहा जाता है रूहानियत और दर्शन पलाश की सादगी में छिपा सबक पलाश का खिलना एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है यह फूल तब खिलता है जब पेड़ के पुराने पत्ते गिर चुके होते हैं और टहनियाँ पूरी तरह नग्न होती हैं यह इस बात का संकेत है कि जब हम अपने पुराने अहंकार और बेकार की यादों को त्याग देते हैं तभी हमारे भीतर ईश्वरीय प्रकाश का उदय होता है पलाश के फूलों को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे प्रकृति सजदे में झुकी हुई है इसके फूलों की बनावट पक्षी की चोंच जैसी आकाश की तरफ होती है जिसे तोता फूल भी कहा जाता है यह बनावट हमें सिखाती है कि खूबसूरती केवल सुगंध में नहीं बल्कि वजूद की सादगी और रंग की गहराई में भी होती है सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व भारतीय परंपराओं में पलाश को बहुत ऊँचा दर्जा दिया गया है वेदों और पुराणों व प्राचीन ग्रंथों के अनुसार पलाश को पवित्र वृक्ष माना गया है इसकी लकड़ी का उपयोग यज्ञों और हवनों में समिधा के रूप में किया जाता है पलाश की लकड़ियां चंद्रमा ग्रह की शांति और अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए हवन में काम में लाई जाती हैं इसके फूल और जड़ भी मुख्य रूप से चंद्रमा ग्रह की अशुभ प्रभाव को कम करने और शुक्र दोष निवारण के लिए काम मिलाया जाता है माना जाता है कि पलाश के तीन पत्तों में त्रिदेवों ब्रह्मा विष्णु और महेश का वास व सत रज तम का प्रतिक होती है भारतीय संस्कृति में पेड़ पौधों को हमेशा पूजनीय माना गया है पीपल बरगद तुलसी की तरह पलाश का भी विशेष स्थान है पुराणों में यह भी वर्णन मिलता है कि पलाश का वृक्ष तप त्याग और साधना का प्रतीक है ऋषि मुनि जंगलों में पलाश के वृक्षों के नीचे बैठकर ध्यान और तपस्या किया करते थे इसकी छाया को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा देने वाली माना गया है कई कथाओं में यह उल्लेख मिलता है कि पलाश के फूल भगवान अग्नि को अत्यंत प्रिय हैं इसलिए इसे अग्नि का प्रतीक भी कहा जाता है इसके चमकीले लाल फूल ऊर्जा शक्ति और जीवन के उत्साह को दर्शाते हैं दिवासी समाज में पलाश का महत्व और भी अधिक है पलाश की किवदंती विरह की अग्नि से जन्मा वृक्ष बहुत पुराने समय की बात है घने जंगलों और शांत पहाड़ियों के बीच एक छोटा सा गाँव बसा था उस गाँव में पलासी नाम की एक युवती रहती थी वह बहुत सुंदर थी लेकिन उसकी सबसे बड़ी पहचान उसका सरल मन और सच्चा प्रेम था गाँव के लोग कहते थे कि उसकी आँखों में नदी जैसी शांति और उसके चेहरे पर बसंत जैसी मुस्कान रहती थी पलासी एक युवक से प्रेम करती थी जिसका नाम माधव था माधव वीर और मेहनती युवक था दोनों बचपन से साथ बड़े हुए थे जंगलों में घूमना नदी किनारे बैठकर बातें करना और पेड़ों की छाँव में सपने देखना उनकी आदत बन गई थी पूरा गाँव जानता था कि दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं लेकिन समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता एक दिन राज्य में युद्ध छिड़ गया और माधव को सेना के साथ जाना पड़ा जाते समय उसने पलासी से कहा मैं बहुत जल्दी लौट आऊँगा तुम मेरा इंतज़ार करना पलासी ने मुस्कुराकर सिर हिला दिया लेकिन उसके मन में अजीब सा डर था दिन बीतते गए मौसम बदलते रहे बरसात आई फिर सर्दी भी गुजर गई लेकिन माधव वापस नहीं आया पलासी हर शाम गाँव के बाहर उस पहाड़ी पर जाकर खड़ी हो जाती जहाँ से दूर तक रास्ता दिखाई देता था उसे विश्वास था कि एक दिन माधव उसी रास्ते से लौटेगा धीरे धीरे उसका इंतज़ार विरह में बदल गया उसकी आँखों से आँसू बहते रहते कहते हैं कि जहाँ उसके आँसू धरती पर गिरते वहाँ मिट्टी लाल हो जाती थी गाँव के बुज़ुर्ग कहते थे कि उसका प्रेम इतना गहरा था कि धरती भी उसकी पीड़ा महसूस करने लगी थी एक दिन खबर आई कि युद्ध में माधव वीरगति को प्राप्त हो गया यह सुनते ही पलासी का मन टूट गया वह उसी पहाड़ी पर चली गई जहाँ वह रोज उसका इंतज़ार किया करती थी आसमान में सांझ उतर रही थी चारों ओर सन्नाटा था पलासी ने रोते हुए आकाश की ओर देखा और कहा यदि मेरा प्रेम सच्चा है तो वह इस धरती पर हमेशा जीवित रहेगा कहते हैं उसी रात तेज आँधी चली बादल गरजे और बिजली चमकी सुबह जब गाँव के लोग पहाड़ी पर पहुँचे तो वहाँ पलासी नहीं थी उसकी जगह एक नया वृक्ष उगा था उस वृक्ष पर लाल लाल फूल खिले थे जो दूर से अग्नि की लपटों जैसे दिखाई देते थे लोगों ने कहा कि यह पलासी के विरह और प्रेम की अग्नि है जिसने फूलों को इतना लाल रंग दिया है उसी दिन से उस वृक्ष को पलाश कहा जाने लगा कहते हैं कि जब बसंत आता है और पलाश के फूल खिलते हैं तब प्रकृति भी उस अधूरी प्रेम कहानी को याद करती है जंगलों में फैले लाल फूल मानो विरह की जलती हुई स्मृतियाँ लगते हैं हवा जब इन फूलों को छूकर गुजरती है तो ऐसा लगता है जैसे कोई प्रेयसी अब भी अपने प्रिय को पुकार रही हो भारतीय लोककथाओं में पलाश को प्रेम प्रतीक्षा और त्याग का प्रतीक माना जाता है इसके अग्नि जैसे फूल केवल सुंदरता नहीं बल्कि उस विरह वेदना की कहानी कहते हैं जिसने एक साधारण प्रेमिका को अमर बना दिया आज भी गाँवों में बुज़ुर्ग कहते हैं कि पलाश का पेड़ केवल जंगल का वृक्ष नहीं बल्कि एक प्रेमिका के आँसुओं से जन्मी जीवित स्मृति है इसके फूलों का लाल रंग हमें याद दिलाता है कि सच्चा प्रेम कभी समाप्त नहीं होता वह प्रकृति में कहीं न कहीं हमेशा जीवित रहता है कई जनजातियाँ इसे अपने धार्मिक और सामाजिक जीवन का हिस्सा मानती हैं विवाह पूजा और अन्य मांगलिक कार्यों में पलाश की शाखाओं का उपयोग किया जाता है कुछ स्थानों पर लोग इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानकर अपने घरों के पास लगाते हैं इसके फूल छाल और बीज आयुर्वेदिक औषधियों में भी प्रयोग किए जाते हैं इस प्रकार पलाश केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और जीवनोपयोगी गुणों के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है बसंत और होली का अटूट रिश्ता होली का त्योहार पलाश के बिना अधूरा होता है पुराने समय में पलाश के फूलों को उबालकर प्राकृतिक केसरिया रंग बनाया जाता था यह प्रथा आज भी कहीं कहीं देखी जा सकती है यह रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है बल्कि इसमें ठंडक भी होती है आज के रसायनिक रंगों के दौर में पलाश का वह प्राकृतिक अक्स कहीं खो गया है जिसे फिर से तलाशने की ज़रूरत है पलाश के औषधीय गुण प्रकृति का चिकित्सक पलाश का हर हिस्सा जड़ तना फूल फल और गोंद आयुर्वेद में संजीवनी की तरह काम करता है फूलों के फायदे पलाश के फूल शीतल प्रकृति के होते हैं इनका उपयोग शरीर की जलन प्यास और गर्मी से संबंधित रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है यदि पलाश के फूलों का अर्क आँखों में डाला जाए तो यह दृष्टि के लिए लाभदायक माना जाता है पत्तों और छाल का उपयोग पलाश के पत्तों का उपयोग सदियों से पत्तल बनाने में होता आया है इन पत्तलों पर भोजन करना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है इसकी छाल का काढ़ा पेट के कीड़ों को खत्म करने anthelmintic में रामबाण सिद्ध होता है पलाश का गोंद कमरकस पलाश के तने से निकलने वाला गोंद कमरकस के नाम से प्रसिद्ध है यह हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के दर्द में विशेष रूप से प्रभावी होता है 5 पर्यावरण और पलाश एक खामोश योद्धा पलाश केवल सुंदर ही नहीं बल्कि पर्यावरण का एक मज़बूत रक्षक भी है मृदा संरक्षण इसकी जड़ें मिट्टी को मज़बूती से पकड़ती हैं जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है सूखा सहने की क्षमता यह पेड़ बेहद कम पानी में भी जीवित रह सकता है इसलिए इसे बंजर भूमि के पुनरुद्धार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है जैव विविधता पलाश के फूल कई पक्षियों और मधुमक्खियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं साहित्य और कला में पलाश कवियों और लेखकों के लिए पलाश हमेशा से प्रेरणा का स्रोत रहा है कबीर से लेकर आधुनिक कवियों तक पलाश की सुर्ख रंगत ने सबकी लेखनी को प्रभावित किया है जंगल में जब पलाश दहकता है तब ऐसा लगता है जैसे धरती का दिल धड़क रहा हो पलाश का रंग विरह और मिलन दोनों का प्रतीक है जहाँ यह एक ओर तपिश और त्याग को दर्शाता है वहीं दूसरी ओर यह प्रेम की उस पराकाष्ठा को भी जाहिर करता है जो किसी के इंतज़ार में सुलग रही हो पलाश का संरक्षण वक्त की माँग आज कंक्रीट के जंगलों के बढ़ते विस्तार के कारण पलाश के असली जंगल सिमटते जा रहे हैं हमें यह समझने की ज़रूरत है कि पलाश का विलुप्त होना केवल एक पेड़ का जाना नहीं है बल्कि हमारी उस सांस्कृतिक विरासत और रूहानी सुकून का खो जाना है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है पलाश के बारे में कुछ ऐसी अनकही और दिलचस्प बातें पलाश केवल एक दरख्त नहीं बल्कि जंगल की वह पुरानी किताब है जिसके हर पन्ने पर कुदरत ने अपनी नजाकत और तेज दोनों लिखे हैं 1 कामदेव का धनुष और प्रेम का अक्स पौराणिक कथाओं में पलाश को बहुत ही रुमानी दर्जा हासिल है कहा जाता है कि प्रेम के देवता ...
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