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description= 7 posts published by Sunny Kumar during August 2018;
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छाप उन्होंने छोड़ी जो विश्वास उन्होंने मुझ पर किया उसने मुझे गढ़ा है हर स्थिति में अटल रहना सिखाया है हमारे देश में अनेक ऋषि मुनि संत आत्माओं ने जन्म लिया है देश की आज़ादी से लेकर आज तक की विकास यात्रा के लिए भी असंख्य लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है लेकिन स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की रक्षा और 21वीं सदी के सशक्त सुरक्षित भारत के लिए अटल जी ने जो किया वह अभूतपूर्व है उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था बाकी सब का कोई महत्त्व नहीं इंडिया फर्स्ट भारत प्रथम ये मंत्र वाक्य उनका जीवन ध्येय था पोखरण देश के लिए जरूरी था तो चिंता नहीं की प्रतिबंधों और आलोचनाओं की क्योंकि देश प्रथम था सुपर कंप्यूटर नहीं मिले क्रायोजेनिक इंजन नहीं मिले तो परवाह नहीं हम खुद बनाएंगे हम खुद अपने दम पर अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक कुशलता के बल पर असंभव दिखने वाले कार्य संभव कर दिखाएंगे और ऐसा किया भी दुनिया को चकित किया सिर्फ एक ताकत उनके भीतर काम करती थी देश प्रथम की जिद काल के कपाल पर लिखने और मिटाने की ताकत हिम्मत और चुनौतियों के बादलों में विजय का सूरज उगाने का चमत्कार उनके सीने में था तो इसलिए क्योंकि वह सीना देश प्रथम के लिए धड़कता था इसलिए हार और जीत उनके मन पर असर नहीं करती थी सरकार बनी तो भी सरकार एक वोट से गिरा दी गयी तो भी उनके स्वरों में पराजय को भी विजय के ऐसे गगन भेदी विश्वास में बदलने की ताकत थी कि जीतने वाला ही हार मान बैठे अटल जी कभी लीक पर नहीं चले उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नए रास्ते बनाए और तय किए आंधियों में भी दीये जलाने की क्षमता उनमें थी पूरी बेबाकी से वे जो कुछ भी बोलते थे सीधा जनमानस के हृदय में उतर जाता था अपनी बात को कैसे रखना है कितना कहना है और कितना अनकहा छोड़ देना है इसमें उन्हें महारत हासिल थी राष्ट्र की जो उन्होंने सेवा की विश्व में मां भारती के मान सम्मान को उन्होंने जो बुलंदी दी इसके लिए उन्हें अनेक सम्मान भी मिले देशवासियों ने उन्हें भारत रत्न देकर अपना मान भी बढ़ाया लेकिन वे किसी भी विशेषण किसी भी सम्मान से ऊपर थे जीवन कैसे जीया जाए राष्ट्र के काम कैसे आया जाए यह उन्होंने अपने जीवन से दूसरों को सिखाया वे कहते थे हम केवल अपने लिए ना जीएं औरों के लिए भी जीएं हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें अगर भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं हो सकता किंतु यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी देश के गरीब वंचित शोषित के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए वे जीवनभर प्रयास करते रहे वेकहते थे गरीबी दरिद्रता गरिमा का विषय नहीं है बल्कि यह विवशता है मजबूरी हैऔर विवशता का नाम संतोष नहीं हो सकता करोड़ों देशवासियों को इस विवशता से बाहर निकालने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किए गरीब को अधिकार दिलाने के लिए देश में आधार जैसी व्यवस्था प्रक्रियाओं का ज्यादा से ज्यादा सरलीकरण हर गांव तक सड़क स्वर्णिम चतुर्भुज देश में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्पों से जुड़ा था आज भारत जिस टेक्नोलॉजी के शिखर पर खड़ा है उसकी आधारशिला अटल जी ने ही रखी थी वे अपने समय से बहुत दूर तक देख सकते थे स्वप्न दृष्टा थे लेकिन कर्म वीर भी थे कवि हृदय भावुक मन के थे तो पराक्रमी सैनिक मन वाले भी थे उन्होंने विदेश की यात्राएं कीं जहाँ जहाँ भी गए स्थाई मित्र बनाये और भारत के हितों की स्थाई आधारशिला रखते गए वे भारत की विजय और विकास के स्वर थे अटल जी का प्रखर राष्ट्रवाद और राष्ट्र के लिए समर्पण करोड़ों देशवासियों को हमेशा से प्रेरित करता रहा है राष्ट्रवाद उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं था बल्कि जीवन शैली थी वे देश को सिर्फ एक भूखंड ज़मीन का टुकड़ा भर नहीं मानते थे बल्कि एक जीवंत संवेदनशील इकाई के रूप में देखते थे भारत जमीन का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्रपुरुष है यह सिर्फ भाव नहीं बल्कि उनका संकल्प था जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया दशकों का सार्वजनिक जीवन उन्होंने अपनी इसी सोच को जीने में धरातल पर उतारने में लगा दिया आपातकाल ने हमारे लोकतंत्र पर जो दाग लगाया था उसको मिटाने के लिए अटल जी के प्रयास को देश हमेशा याद रखेगा राष्ट्रभक्ति की भावना जनसेवा की प्रेरणा उनके नाम के ही अनुकूल अटल रही भारत उनके मन में रहा भारतीयता तन में उन्होंने देश की जनता को ही अपना आराध्य माना भारत के कण कण कंकर कंकर भारत की बूंद बूंद को पवित्र और पूजनीय माना जितना सम्मान जितनी ऊंचाई अटल जी को मिली उतना ही अधिक वह ज़मीन से जुड़ते गए अपनी सफलता को कभी भी उन्होंने अपने मस्तिष्क पर प्रभावी नहीं होने दिया प्रभु से यश कीर्ति की कामना अनेक व्यक्ति करते हैं लेकिन ये अटल जी ही थे जिन्होंने कहा हे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना गैरों को गले ना लगा सकूं इतनी रुखाई कभी मत देना अपने देशवासियों से इतनी सहजता औरसरलता से जुड़े रहने की यह कामना ही उनको सामाजिक जीवन के एक अलग पायदान पर खड़ा करती है वेपीड़ा सहते थे वेदना को चुपचाप अपने भीतर समाये रहते थे पर सबको अमृत देते रहे जीवन भर जब उन्हें कष्ट हुआ तो कहने लगे देह धरण को दंड है सब काहू को होये ज्ञानी भुगते ज्ञान से मूरख भुगते रोए उन्होंने ज्ञान मार्ग से अत्यंत गहरी वेदनाएं भी सहन कीं और वीतरागी भाव से विदा ले गए यदि भारत उनके रोम रोम में था तो विश्व की वेदना उनके मर्म को भेदती थी इसी वजह से हिरोशिमा जैसी कविताओं का जन्म हुआ वे विश्व नायक थे मां भारतीके सच्चे वैश्विक नायक भारत की सीमाओं के परे भारत की कीर्ति और करुणा का संदेश स्थापित करने वाले आधुनिक बुद्ध कुछ वर्ष पहले लोकसभा में जब उन्हें वर्ष के सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से सम्मानित किया गया था तब उन्होंने कहा था यह देश बड़ा अद्भुत है अनूठा है किसी भी पत्थर को सिंदूर लगाकर अभिवादन किया जा रहा है अभिनंदन किया जा सकता है अपने पुरुषार्थ को अपनी कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र के लिए समर्पित करना उनके व्यक्तित्व की महानता को प्रतिबिंबित करता है यही सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए उनका सबसे बड़ा और प्रखर संदेश है देश के साधनों संसाधनों पर पूरा भरोसा करते हुए हमें अब अटल जी के सपनों को पूरा करना है उनके सपनों का भारत बनाना है नए भारत का यही संकल्प यही भावलिए मैं अपनी तरफ से और सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं उन्हें नमन करता हूं share this share on facebook opens in new window facebook share on whatsapp opens in new window whatsapp share on x opens in new window x email a link to a friend opens in new window email share on reddit opens in new window reddit share on pinterest opens in new window pinterest share on linkedin opens in new window linkedin share on tumblr opens in new window tumblr share on telegram opens in new window telegram print opens in new window print like loading august 17 2018 1 पाकिस्तान को दुत्कारती अटलजी की यह कविता अवश्य पढ़ें एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते पर स्वतंत्रता भारत का मस्तक नहीं झुकेगा अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतंत्रता अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतंत्रता दु खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो चिनगारी का खेल बुरा होता है औरों के घर आग लगाने का जो सपना वो अपने ही घर में सदा खरा होता है अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र ना खोदो अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ ओ नादान पड़ोसी अपनी आंखे खोलो आजादी अनमोल ना इसका मोल लगाओ पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है तुम्हे मुफ़्त में मिली न कीमत गयी चुकाई अंग्रेजों के बल पर दो टुकडे पाये हैं माँ को खंडित करते तुमको लाज ना आई अमेरिकी शस्त्रों से अपनी आजादी को दुनिया में कायम रख लोगे यह मत समझो दस बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से तुम बच लोगे यह मत समझो धमकी जिहाद के नारों से हथियारों से कश्मीर कभी हथिया लोगे यह मत समझो हमलों से अत्याचारों से संहारों से भारत का शीष झुका लोगे यह मत समझो जब तक गंगा मे धार सिंधु मे ज्वार अग्नि में जलन सूर्य में तपन शेष स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे अगणित जीवन यौवन अशेष अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध काश्मीर पर भारत का सर नही झुकेगा एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते पर स्वतंत्र भारत का निश्चय नहीं रुकेगा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी share this share on facebook opens in new window facebook share on whatsapp opens in new window whatsapp share on x opens in new window x email a link to a friend opens in new window email share on reddit opens in new window reddit share on pinterest opens in new window pinterest share on linkedin opens in new window linkedin share on tumblr opens in new window tumblr share on telegram opens in new window telegram print opens in new window print like loading august 17 2018 1 अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे विचार मरते नहीं शब्द चिरायु है आपके कहे हर शब्द आपकी लिखी हर बात हमारे बीच है और रहेंगी राष्ट्र सदैव आपका ऋणी रहेगा हिन्दी हिन्दू और हिंदुस्तान को आपके जाने का दुख है पर फिर आशाएं भी है कि आपके लगाए पौधे इस चमन के चेहरे को बदल देंगे आपकी सदा ही जय हो हे महामानव आपने मेरे और मेरे जैसे लाखों लोगों का लेखन और राजनीति में रुचि उतपन्न किया आप बैकुण्ठ वासी हो यही यही कामना अटल जी की यह कविता आज बहुत रुलाती है आपने मौत पर एक कविता जीतेजी ही लिखी उसे ही दुबारा लिखता हूँ ठन गई मौत से ठन गई जूझने का मेरा इरादा न था मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई मौत की उमर क्या है दो पल भी नहीं जिंदगी सिलसिला आज कल की नहीं मैं जी भर जिया मैं मन से मरूं लौटकर आऊंगा कूच से क्यों डरूं तू दबे पांव चोरी छिपे से न आ सामने वार कर फिर मुझे आजमा मौत से बेखबर जिंदगी का सफ़र शाम हर सुरमई रात बंसी का स्वर बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं दर्द अपने पराए कुछ कम भी नहीं प्यार इतना परायों से मुझको मिला न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है पार पाने का क़ायम मगर हौसला देख तेवर तूफ़ां का तेवरी तन गई मौत से ठन गई share this share on facebook opens in new window facebook share on whatsapp opens in new window whatsapp share on x opens in new window x email a link to a friend opens in new window email share on reddit opens in new window 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हजारों उनसे लोहा लेते हुए शहीद हुये आज अंग्रेजी संदेशों की बाढ़ में कितने मैसेज पढ़े आपने पढ़े जिसमे हैप्पी फ्रीडम डे लिखा था क्या वाकई फ्रीडम और इंडिपेंडेंस में कोई अंतर नहीं इन सवालों के जवाब जरूर ढूंढे और हाँ ये आपको किसी चाटुकार द्वारा लिखे किसी किताब में नहीं मिलेगा आप सब को आजादी मुबारक इस उम्मीद के साथ कि आपने आज जो भी देशभक्ति की बातें की है उसे निभाएंगे और आजादी को आवारगी में न बदलेंगे न किसी को बदलने देंगे जय हिन्द share this share on facebook opens in new window facebook share on whatsapp opens in new window whatsapp share on x opens in new window x email a link to a friend opens in new window email share on reddit opens in new window reddit share on pinterest opens in new window pinterest share on linkedin opens in new window linkedin share on tumblr opens in new window tumblr share on telegram opens in new window telegram print opens in new window print like loading august 15 2018 3 इस स्वतन्त्रता दिवस आप इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य ढूंढे समस्त भरतवंश को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं हम सब ऋणी है उन हजारों लाखों स्वतन्त्रता सेनानियों के जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस देश का सम्मान स्थापित किया मित्रों देश की करेंसी पे जगह कम है शायद इसीलिये केवल गांधीजी फिट बैठते है पर हमारे और आपके दिलों में उन क्रांतिवीरों के लिए आदर कम ना रहे जिन्होंने अपना सर्वस्व त्यागा और भारत माँ की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी आज वक्त है खुदिरामबोस बैकुंठ शुक्ल जुब्बा सहनी जैसे उन लाखों वीरों को याद करने का जिनकी गाथा गुमनाम हो गई आज दिन है उस नेताजी को याद करने का जिसने अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए गैर मुल्क में भारतीय फौज खड़ी की सो आप उन लोगों को भी न केवल याद करें उनकी कुछ बातें खुद में उतारे तभी यह मुल्क अखण्ड रहेगा आज 14 अगस्त है पाकिस्तान आज अपनी आजादी मना रहा है इसी अगस्त के महीने में सन 1947 में जब दो मुल्क आजादी की खुशी में पागल हुआ जा रहा था तो वहीं दोनों मुल्कों में लाखों लोग काटे गए उनको घर व्यापार छोड़कर भागना पड़ा क्यों पाकिस्तान की पैदाईश का आधार क्या था क्या नेताजी और गरम दल के बड़े क्रांतिकारीयों के रहते भी पाकिस्तान होता बंटवारा होता आपके मन को बार बार आपसे पूछना चाहिए कि भगत सिंह को बचाने के लिए कौन कौन वकील लड़ा था जबकि गांधीजी समेत बहुत से लोग वकील थे जिन महापुरुषों की कल हम स्तुति करेंगे उनमें से कौन कौन लोग थे जो आजादी के घोषणा होने तक जीवित थे जो जीवित रहे उनका मुल्क को एक रखने का क्या प्रयास था कितने लोगों ने देश की अखंडता बनाये रखने के लिए लड़ाई की आजादी क्या वाकई हमने बिना खड्ग बिना तलवार पाई जैसा अक्सर गीतों काव्यों कहानियों के द्वारा बताया जाता है नेहरूजी महान नेता थे उनको अंग्रेजों ने जेल में बहुत यातना दी ऐसा ही तो और उनके इसी संघर्ष के पारितोषिक स्वरूप उनको देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया पर जिस देश को हम लोकतांत्रिक देश कहते है उसके पहले प्रधानमंत्री को किसने चुना लोकतंत्र 1950 बहाली से पहले तक जो तंत्र था उसे इतिहास क्या कहता है आजाद हिंद फौज और तमाम शहीद क्रांतिकारियों के परिवारों को आजाद मुल्क से क्या सम्मान मिला ये कुछ सवाल है जिसके जवाब अवश्य ढूंढे तभी आप समझ पाएंगे कि हमने क्या गलत किया और क्यों इस मुल्क में यहीं खाकर इसी के टुकड़े टुकड़े हो ऐसा नारा लगाते है जय हिंद जय हिंद की सेना वन्दे मातरम भारत माता की जय सन्नी कुमार http www sunnymca wordpress com share this share on facebook opens in new window facebook share on whatsapp opens in new window whatsapp share on x opens in new window x email a link to a friend opens in new window email share on reddit opens in new window reddit share on pinterest opens in new window pinterest share on linkedin opens in new window linkedin share on tumblr opens in new window tumblr share on telegram opens in new window telegram print opens in new window print like loading august 14 2018 4 इस स्वतन्त्रता दिवस आप इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य ढूंढे समस्त भरतवंश को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं हम सब ऋणी है उन हजारों लाखों स्वतन्त्रता सेनानियों के जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस देश का सम्मान स्थापित किया मित्रों देश की करेंसी पे जगह कम है शायद इसीलिये केवल गांधीजी फिट बैठते है पर हमारे और आपके दिलों में उन क्रांतिवीरों के लिए आदर कम ना रहे जिन्होंने अपना सर्वस्व त्यागा और भारत माँ की आजादी के लिए अपने प्राणों की 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