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vichar darshanam vichar motivation kadwi baat विचार दर्शनम् सामग्री पर जाएं vichar darshanam vichar motivation kadwi baat विचार दर्शनम् about contact twitter फेसबुक इंस्टाग्राम प्रेम बाजार में नहीं बिकता प्रेम न खेतौं नीपजै प्रेम न दृष्टि बिकाइ कबीर जी महाराज प्रेम को सुंदर शब्दों में व्यक्त करते हैं प्रेम ना खेत में उपजता है और ना ही प्रेम किसी बाजार में बिकता है प्रेम को कोई फसल की भांति उपजा नहीं सकता और ना हीं प्रेम को कोई किसी बाजार से खरीद सकता है 16th अगस्त 2025 ईश्वर का गुणगान करने में संकोच जासु नाम जपि सुनहु भवानी भव बंधन काटहिं नर ग्यानी रामचरितमानस में भोलेनाथ शंकर जी देवी पार्वती जी से हनुमान जी के लिए कहते हैं जिन ईश्वर का मंत्र नाम जपने से जीव ज्ञानी होकर जन्म मरण के बंधन को काट देता है जिनके यश का गान व्यक्ति पाप पुण्य बंधन से मुक्त हो जाता है 16th अगस्त 2025 माता को माता मत कहो किसी को धरती को माता कहने में तकलीफ होता है गंगा को गंगा माता कहने में तकलीफ होता है प्रकृति को माता कहने में तकलीफ होता है पंचतत्व से निर्मित यह प्रकृति अनेक जीव और वनस्पतियों का निर्माण करती है एक दिन अंत समय में सभी निर्माण वनस्पति और जीव स्वत पंचतत्व में विलीन हो 15th अगस्त 2025 ईश्वर शक्ति चिंतन सठ सुधरहिं सत्संगति पाई तुलसी बाबा श्री रामचरितमानस में कहते हैं जो स्वभाव से अधम और सठ होता है वह भी सत्य के करीब जाकर सत्य का साथ पाकर सत्य विचार का संगत पाकर अपने आप हीं सुधर जाता है व्यक्ति के जीवन में अच्छे और बुरे के साथ का बहुत प्रभाव रखता 14th अगस्त 2025 लक्ष्य की गाड़ी सपनें में जीने की आदत ना डालो अपनी आदत सुधार डालो सपना तो सपना होता है हकीकत में समय लगाओ कहीं लक्ष्य की गाड़ी छूट न जाए 11th अगस्त 2025 2025 vichar darshanam सदस्यता लें सदस्यता लिया vichar darshanam sign me up already have a wordpress com account log in now गोपनीयता vichar darshanam सदस्यता लें सदस्यता लिया साइन अप करें लॉग इन report this content view site in reader manage subscriptions collapse this bar design a site like this with wordpress com प्रारंभ करें
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