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सुसंस्कृत और सभ्य नागरिक बनाती है और चूँकि देश के नागरिक ही देश को समृद्धि के शिखर या पतन की गहरी खाई में ले जा सकते हैं अतः शिक्षा जितनी व्यक्ति के लिए उपयोगी है उतनी ही समाज देश और राष्ट्र के लिए देश की शिक्षा प्रणाली पर ही देश की प्रगति या उसका ह्रास निर्भर करते हैं शिक्षा का निजीकरण education privatization प्राचीन भारत में शिक्षा की व्यवस्था ऋषियों के आश्रम में थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए युवक ऋषियों के आश्रम या गुरु के घर जाता था गुरु गृह गये पढने रघुराई अल्पकाल सब विद्या आई उस समय पच्चीस वर्ष की आयु तक शिक्षार्थी ऋषि आश्रम में रहता था और यह काल ब्रह्मर्याश्रम कहलाता था समय के अनुरूप यह शिक्षा प्रणाली ठीक ही थी वर्तमान शिक्षा प्रणाली का स्वरूप बहुत कुछ अंग्रेजी शासन की देन है और उन्होंने शिक्षा की व्यवस्था अपने स्वार्थ के लिए की थी भारतवासियों के लाभार्थ नहीं स्वतंत्रता के बाद भी हमारी शिक्षा प्रणाली में अधिक परिवर्तन नहीं हुआ है अंग्रेजी शासन काल में शिक्षा के स्तर थे प्राथमिक शिक्षा माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा और विश्वविद्यालयीय शिक्षा आज पूर्व प्राथमिक या नर्सरी शिक्षा भी दी जाने लगी है वर्तमान शिक्षा प्रणाली कह सकते हैं education system in india पूर्व प्राइमरी तथा प्राइमरी शिक्षा तो निजी या व्यक्तिगत क्षेत्र के अन्तर्गत हैं इनकी व्यवस्था इनका संचालन इनका नीति निर्धारण कोई संस्था धार्मिक या सामाजिक करती है माध्यमिक उच्चतरमाध्यमिक महाविद्यालयीय शिक्षा का प्रबन्ध मिश्रित है कुछ संस्थाएँ किसी संस्था के अधीन काम करती हैं जैसे डी ए वी महाविद्यालय सनातन घर्म महाविद्यालय सेंट स्टीफेन्स कालेज तेग बहादुर खालसा कालेज आदि ये संस्थाएँ सरकारी अनुदान पाती हैं और उनका खर्च इस अनुदान राशि या छात्रों से प्राप्त शुल्क से ही चलता है वे अपनी जेब से कुछ नहीं देतीं आरम्भ में केवल भवन निर्माण कर अपना स्वामित्व जताती हैं और बाद में बस चले तो संस्था की होनेवाली आय का कुछ भाग अपने खाते में जमा करती रहती हैं इनका दायित्व कुछ नहीं केवल अधिकार ही अधिकार होता है और साथ ही वे संस्था को अपने धर्म अपनी विचारधारा के प्रचार का माध्यम भी बनाती हैं शेष संस्थाएँ राजकीय संस्थाएँ हैं जैसे राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय या गवर्मेंट महाविद्यालय इनको सरकार से अनुदान मिलता है और इनकी प्रबन्ध समितियों में सरकार द्वारा नामित व्यक्ति सदस्य होते हैं इनका प्रबन्ध संचालन नीति निर्धारण सब कुछ सरकार के हाथों में होता है देश के संविधान में भाषिक तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी अपनी शिक्षा संस्थाएँ खोलने के लिए कुछ विशिष्ट सुविधाएँ और विशेष अधिकार दिये हैं और वे इन अधिकारों का दुरूपयोग कर रही हैं इन संस्थाओं में जो शिक्षा दी जाती है उससे धार्मिक उन्माद पैदा होता है संकीर्णता जन्म लेती है और देश की एकता और अखंडता को आघात लगता है मिश्रित शिक्षा प्रणाली के इन दोषों को देखते हुए शिक्षा के राष्ट्रीयकरण की माँग ने जोर पकड़ा कहा गया कि शिक्षा को व्यक्तिगत या संस्थागत इजारेदारी से हटाकर सरकारी क्षेत्र की बना दी जाए उस पर राज्य का नियंत्रण हो उसका प्रबन्ध संचालन नीति निर्धारण पाठ्यक्रम सब कुछ राज्य करे उनके विचार से इससे सारे देश की शिक्षा में एकरूपता आयेगी वह देश के आदर्शों के अनुरूप होगी निहित स्वार्थों से मुक्त हो जायेगी इस व्यवस्था में एक ही खतरा है कि सरकारें बदलती रहती हैं शासन की बागडोर सम्भालनेवाले राजनितिक दल बदलते रहते हैं जो नीति एक सरकार अपनाती है उसे दूसरी सरकार बदल देगी और इस प्रकार शिक्षा क्षेत्र में अस्थिरता आराजकता उत्पन्न होगी शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण भी आवश्यक है और शिक्षा की स्वायत्तता और स्वतंत्रता भी अक्षुण्ण बनी रहनी चाहिए इसके लिए सुझाव यह है कि जीवन बिमा निगम विश्वविध्यालय अनुदान आयोग बैंकों के राष्ट्रीयकरण की तरह शिक्षा के संचालन और प्रशासन के लिए एक स्वतंत्र संगठन बनाया जाये जिसमें देश भर के शिक्षाविदों शिक्षकों और अभिभावकों के प्रतिनिधि हों तथा कुछ सरकार के नामजद व्यक्ति भी यह संगठन देश भर की शिक्षा नीति निर्धारित करे तथा शिक्षा संस्थाओं की गतिविधियों पर दृष्टि रखे उनका समय समय पर मार्ग दर्शन करता रहे आज सामान्य शिक्षा का युग समाप्त हो गया है सर्वत्र विशेषज्ञों प्रौद्योगिकी निपुण व्यक्तियों वैज्ञानिकों की माँग है सरकार के बजट में शिक्षा के लिए आबंटित धन राशि सामान्य शिक्षा संस्थानों के लिए ही पर्याप्त नहीं होती अतः उसके लिए चिकित्सा प्रौद्योगिकी ज्ञान विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में शिक्षा देनेवाले नए नए संस्थानों को खोलने उनके भवन निर्माण उनकी प्रयोगशालाओं के लिए कीमती उपकरण जुटाने के लिए धन जुटाना कठिन ही नहीं असम्भव है इस स्थिति में यह आवश्यक है कि निजी संस्थाओं को समर्थ साधनसम्पन्न औद्योगिक घरानों को टाटा रिलाइंस बिड़ला मोदी आदि कम्पनियों के स्वामियों को प्रौद्योगिकी चिकित्सा इंजीनियरी आदि के शिक्षा संस्थान खोलने की अनुमति दी जाये ताकि देश के प्रतिभासम्पन्न युवक जो अवसरों के अभाव में मारे मारे फिरते हैं उन्हें अपनी प्रतिभा और योग्यता के उपयोग का अवसर मिले और वे अपना जीवन सुखी तथा देश को समृद्ध बना सकें share facebook twitter stumbleupon linkedin pinterest previous general knowledge test july 2026 सरकारी नौकरी की परीक्षा से जुड़े प्रश्न next योगी सरकार ने शुरू किया नशा विरोधी अभियान related articles essay on population growth for students and children july 11 2026 गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर हिंदी निबंध छात्रों और बच्चों के लिए january 24 2026 मकर संक्रांति पर हिन्दी निबंध विद्यार्थियों के लिए january 14 2026 नवरात्रि पर निबंध navratri essay in hindi for students children september 21 2025 राष्ट्रभाषा हिन्दी दशा और दिशा पर विद्यार्थियों के लिए हिन्दी निबंध september 13 2025 गणेश चतुर्थी पर निबंध विद्यार्थियों के 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