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नव कुण्डलिया राज छंद नव कुण्डलिया राज छंद monday april 4 2016 रमेशराज के नव कुंडलिया राज छंद भाग 2 रमेशराज के नव कुंडलिया राज छंद भाग 2 नव कुंडलिया राज छंद आज क्रान्ति का राग जरूरी राग जरूरी आग जरूरी आग जरूरी गमगीं मत हो गमगीं मत हो भर हिम्मत को भर हिम्मत को खल से टकरा राग जरूरी आज क्रान्ति का रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद नयी सभ्यता आयी ऐसी आयी ऐसी कैसी कैसी कैसी कैसी चमक सुहानी जेठ संग भागे द्वौरानी द्वौरानी ने त्यागी लज्जा लज्जाहीना नयी सभ्यता रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद हरदम अब तो सत्ता के यम यम गम देते चीखें मातम मातम से हम उबरें कैसे कैसे हल निकलेंगे ऐसे ऐसे में बदलो ये सिस्टम सिस्टम लूट रहा है हरदम रमेश राज नव कुंडलिया राज छंद धन पशुओं को पुष्ट करें सब पुष्ट करें सब ये नेता अब ये नेता अब जन को लूटें जन को लूटें मारें कूटें मारें कूटें अति निर्बल जो पुष्ट करें सब धन पशुओं को रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद घर के ऊपर छान न छप्पर छान न छप्पर वर्षा का डर वर्षा का डर धूप जलाए धूप जलाए होरी अक्सर होरी अक्सर ताने चादर ताने चादर घर के ऊपर रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद कैसा योगी नारी रोगी नारी रोगी मिलन वियोगी मिलन वियोगी धन को साधे धन को साधे राधे राधे राधे राधे रटता भोगी रटता भोगी कैसा योगी रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद इतना वर दो मात शारदे मात शारदे हाथ न फैले हाथ न फैले कभी भीख को कभी भीख को अब इतना दो अब इतना दो दूं जग भर को दूं जग भर को इतना वर दो रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद हत्यारा अब मुस्काता है मुस्काता है तम लाता है तम लाता है देता मातम देता मातम जब हँसता यम यम फूलों सम लगता प्यारा प्यारा प्यारा अब हत्यारा रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद आओ प्यारो ग़म को मारो ग़म को मारो तम को मारो तम को मारो चलो नूर तक चलो नूर तक दूर दूर तक दूर दूर तक रश्मि उभारो रश्मि उभारो आओ प्यारो रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद कबिरा सूर संत ज्यों नरसी नरसी मीरा दादू तुलसी तुलसी जैसे अब बगुला सम अब बगुला सम मीन तकें यम यम का धर्म सिर्फ अब धन ला धन ला बोले मीरा कबिरा रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद जनता चुनती जाति रंग को जाति रंग को अति दबंग को अति दबंग को जीत मिले जब जीत मिले जब मद में हो तब मद में हो तब नादिर बनता नादिर बनता कटती जनता रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद सदविचार सदनीति यही अब अब बन डाकू हम सबके सब हम सबके सब कुण्डल छीनें कुण्डल छीनें मारें मीनें मारें मीनें कर ऊंचा कद कद को भोग विचार बना सद रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद कर परिवर्तन बहुत जरूरी बहुत जरूरी दुःख से दूरी दुःख से दूरी तब होगी हल तब होगी हल चुनें वही दल चुनें वही दल खुश हो जन जन खुश हो जन जन कर परिवर्तन रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद तम का घेरा नहीं सवेरा नहीं सवेरा सिर्फ अँधेरा सिर्फ अँधेरा चहुँ दिश दंगे चहुँ दिश दंगे भूखे नंगे भूखे नंगे यम का डेरा यम का डेरा तम का घेरा रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद खूनी पंजे फंद शिकंजे फंद शिकंजे छुरी तमंचे छुरी तमंचे लेकर कट्टा लेकर कट्टा दीखें नेता दीखें नेता मति के अन्धे अन्धे के हैं खूनी पंजे रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद जन के बदले नेता को ले नेता को ले कवि अब बोले कवि अब बोले खल की भाषा खल की भाषा में है कविता कविता में विष ही विष अर्जन विष अर्जन को आतुर कवि मन रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद जन के बदले नेता को ले नेता को ले कवि अब बोले कवि अब बोले खल की भाषा खल की भाषा में है कविता कविता में विष ही विष अर्जन विष अर्जन को आतुर कवि मन रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद सब कुछ मंहगा बोले नथुआ बोले नथुआ ये लो बथुआ बथुआ भी अब भाव पिचासी भाव पिचासी चाल सियासी चाल सियासी चुन्नी लहंगा चुन्नी लहंगा सब कुछ मंहगा रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद ओ री मैना ओ री मैना मेरी बेटी मेरी बहना मेरी बहना जाल बिछाये जाल बिछाये खल मुस्काये खल मुस्काये बच के रहना बच के रहना ओ री मैना रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद देशभक्त की लीला न्यारी लीला न्यारी कर तैयारी कर तैयारी लूट मचाये लूट मचाये जन को खाये जन को खाये प्यास रक्त की प्यास रक्त की देशभक्त की रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद सद विरोध पर पल पल हमले हमले किये असुर ने खल ने खल ने चाही वही व्यवस्था वही व्यवस्था दीन अवस्था दीन अवस्था में हो हर स्वर स्वर पर चोटें सद विरोध पर रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद इस सिस्टम पर चोट किये जा चोट किये जा वीर बढ़े जा वीर बढ़े जा ला परिवर्तन ला परिवर्तन दुखी बहुत जन दुखी बहुत जन मातम घर घर चोट किये जा इस सिस्टम पर रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद वीर वही है लड़े दीन हित लड़े दीन हित तुरत करे चित तुरत करे चित उस दुश्मन को उस दुश्मन को दुःख दे जन को जन को सुख हो नीति यही है लड़े दीन हित वीर वही है रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद सौदागर हैं ये इज्जत के ये इज्जत के धन दौलत के धन दौलत के नत नारी के नत नारी के औ कुर्सी के कुर्सी पर ये ज्यों अजगर हैं ज्यों अजगर हैं सौदागर हैं रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद सपने खोये आज़ादी के आज़ादी के उस खादी के उस खादी के जंग लड़ी जो जंग लड़ी जो सत्य जड़ी जो जो थी ओजस तम को ढोए आज़ादी के सपने खोये रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद जाति धरम के लेकर नारे लेकर नारे अब हत्यारे अब हत्यारे जन को बाँटें जन को बाँटें मारें काटें काटें जन को वंशज यम के लेकर नारे जाति धरम के रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद बस्ता भारी लेकर बच्चा लेकर बच्चा सन्ग नाश्ता सन्ग नाश्ता पढ़ने जाये पढ़ने जाये पढ़ ना पाये पढ़ ना पाये पुस्तक सारी पुस्तक सारी बस्ता भारी रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद घर लूटा घर के चोरों ने चोरों ने आदमखोरों ने आदमखोरों ने सज खादी खादी सँग पायी आज़ादी आज़ादी में गुंडे बनकर करते ताण्डव आकर घर घर रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद बस्ता भारी लेकर बच्चा लेकर बच्चा सन्ग नाश्ता सन्ग नाश्ता पढ़ने जाये पढ़ने जाये पढ़ ना पाये पढ़ ना पाये पुस्तक सारी पुस्तक सारी बस्ता भारी रमेशराज नव कुंडलिया राज छंद अजब रंग है आज सियासी आज 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खल बोले खल बोले विष जैसा घोले घोले सहमति में कड़वाहट कड़वाहट से आये संकट संकट में साँसें जन जन की जन की पीड़ा रही न कवि की रमेशराज रमेशराज 15 109 ईसानगर अलीगढ़ २०२००१ मो ९६३४५५१६३० posted by रमेशराज तेवरीकार at 2 28 am no comments email this blogthis share to x share to facebook share to pinterest older posts home subscribe to posts atom about me रमेशराज तेवरीकार view my complete profile blog archive 2016 3 april 3 रमेशराज के नव कुंडलिया राज छंद भाग 2 रमेशराज के नव कुंडलिया राज छंद भाग 1 क्या है नव कुंडलिया राज छंद rameshraj simple theme powered by blogger
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