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ख्याल करने की कोशिश कीजिए जो ये कहानी पढकर आपके बारे मंे ऐसे ख्याल रखे उस इंसान की जिंदगी मंे अपने द्वारा किये गये कामों के लिए दिल से मन ही मन मंे माफी मांगने का मौका मत चूकना लेकिन इसमें भी एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जो भी आप सोचो वो तार्किक हों सामान्यतः तो आप जिसके बारे मंे ऐसा सोचते हो कि उसने कुछ गलत किया वो भी ऐसा ही सोचता होगा कि आपने उसके साथ गलत किया है ये ठीक वैसा ही है कि एक मैदान मंें अंग्रेजी में 6 लिखा और उसके दोनो ओर दो लोग खडे हैं तो एक को 6 दिखेगा और एक को 9 दिखेगा दोनो को लगता है कि वे सही हैं लोग कहते हैं दोनो सही है पर दोनो एक बात मंे सही कैसे हो सकते है दोस्तों गलत तो वो है ना जो उपर की तरफ उल्टी तरफ खडा है जो जहां से देख रहा है जैसा उसको दिख रहा है वो उसके नजरिये से सही भले ही हो वास्तविकता मंे सही नही हो सकता है खैर अब इन दार्शनिक बातों को छोडते है और मुद्दे पर आते हैं हां तो आपको भी पहला पेज पढते पढते किसी ऐसे नाम के रिश्तें और दिखावे के अपनेपन की याद आने लगी होगी जिनकी आपको भी बरसी मनानी होगी तो आज हम उस रिश्ते की बरसी मनाने से पहले जरा सा उसके बारे मंे सोचते हैं हम सोचें कि ऐसे रिश्तों की बरसी मनाकर उनका हमेशा हमेशा के लिए तर्पण श्राद्धकर्म करना और उन भद्दे मोटे यादों के पुलिंदों को हमेशा हमेशा के लिए बहा देना चाहिए और खुद को मुक्त कर देना चाहिए हालांकि कुछ हालातों मे देखा जा सकता है अगर सुधार की गुंजाइश है और पहले का विनाश हल्का सा है तो चाहो तो एक मौका और देकर देख लो वर्ना बरसी के साथ ही तर्पण भी करलो दोस्त बुरा मत सोचो उन लम्हों के बारे में उन लोगों के बारे मंे कर्म का फल होता है जो हम सब भोगते है हमारे कर्माे का ही फल होगा जो हमने उसदिन भोगा था दुख भी हुआ था तकलीफ भी हुई थी और अब तो धीरे धीरे बस केवल मुस्कुराना ही तो आता है उन लम्हों को याद करके जैसे हमने उस दिन वो कर्माें का फल भोगा था हमारा फल किसी और का कर्म था जो उन्होंने उस दिन कर दिया तो अब उन कर्माें के फल कोे वो भोग रहे होंगे या भोगेंगे चुंकि वो अब दूर जा चुके हैं हमसे तभी तो उन रिश्तों की हम बरसी मना रहे हैं जैसे बरसी और श्राद्ध हम साल मंे दो बार मनाते है वैसे ही कभी कभार जब लगे जरूरत के वक्त उनके लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से खडे रहें अरे जैसे किसी अपने के मर जाने के बाद हमंे पता नही होता वो कंहा और क्या कर रहे हैं और वास्तविकता में हमारे हर लम्हे से वो लोग हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं वैसे ही बीते एक बरस मंे उन्हें हमारे बारे में क्या ही पता है कितना बदल गई हमारी जिंदगी उन्हे क्या पता इक किसान मर गया बुआई के बाद उसे क्या पता कि उसके खेत की फसल कैसी उग रही है उसने खो दिया मौका देखने का अपने खेत के पेड़ो को बढते देखने का उसको खबर नही कि कब खाद दी गई कब सहारा दिया गया कब और कैसे पहली कोंपल उगी उस पौधे की कैसे उसकी डालियां खिली कैसे उस पौधे ने पहली हवा मे अपने आपको छटकाया और मस्त बेफिक्री के साथ खिलखिलाके नाच गाने का मजा लिया खैर मरने के बाद ऐसा सब होना तो लाजमी है मगर जीते जी ऐसे हालात बन जाएं कि हमें हमारे अपनों की जिंदगी का एक भी लम्हा पता ना हो तो वो भी एक बडी त्रासदी क्या होगी और इससे बडा अभागापन क्या होगा कि आप अपनों के हाल ना जान पाओ एक नन्हे से बच्चे को बढते ना देख पाओ अपने बाग केे फलों को ना छू पाओ फूलों की खुश्बु ना सूंघ पाओ और पत्तांे की सरसराहट को खिलखिलाहट को ना सुन पाओ खैर अब इन सब बातों में क्या रखा है अब हम आगे बढते हैं ऐसे ही कुछ अभागे रिश्तों की बरसी मनाने की ओर इनकी छोटी बडी घटनाओं को समझने मंे read more रिश्तों की बरसी 1 by तरूण जोशी नारद बरसी बरसी इस नाम से क्या ख्याल जेहन में उपजता है हां मैं भी उसी की बात कर रहा हूं हां वही बरसी जो किसी अपने के हमेशा हमेशा के लिए रूखसत हो जाने दूर हो जाने या मर जाने की सालगिरह के तौर पर मनाया जाता है वैसे तो बरसी अपनों की मनाई जाती हैं रिश्तेदारों की मनाई जाती है उनके साथ के लम्हों को याद किया जाता है उनकी शांति की प्रार्थना की जाती है उनकी मुक्ति की दुआ की जाती है लेकिन हर बार बरसी अपनों की नही कई बार अपनेपन की भी मनाई जाती है रिश्तेदारों की ही नहीं रिश्तों की भी मनाई जाती है तो आज हम भी ऐसे ही एक बरसी मनाने जा रहे हैं रिश्तों की बरसी सुनने मंे भले ही अजीब सा लगे लेकिन हां ये सच है आप भी याद करिये जीवन की किताब के किसी एक कोने मंे आपने भी दफन किये होंगे कुछ पन्ने कहीं किसी छोर पर अरे वैसे ही जैसे बचपन में किसी विषय की कॉपी मंे कुछ गलतियां हो जाने पर उन्हें छिपाने और दूसरे छोर के पृष्ठों को फटकर गिरने से बचाने के लिए हम स्टेपल कर लेते थे ठीक उसी तरह से कुछ पेज आपको भी मिल जाएंगें अपनी जिंदगी की किताब में हो सकता है आपकी किताब मंे ऐसे स्टेपलर लगे पेजों का पुलिंदा एक हो या हो सकता है वो एक से अधिक हो हो सकता है कि स्टेपलर की पिन चमक रही हो और बयां कर रही है अपना दर्द और जता रही है कि जख्म अभी हरा है या फिर यूं भी हो सकता है कि वो पुलिदों पर लगी पिन जंग खा चुकी हो और उन अपनो को भी भुला चुकी हो लेकिन जैसे हमारी संस्कृति में रिवाज है बरसी मनाने का लम्हों को याद करने का और शांति या मुक्ति की प्रार्थना करने का तो हम अब एक अनूठी बरसी मनाते है उन लम्हों और वो दर्द देने वाले की मुर्खता और उनकी बचकानी हरकतों को याद करते हैं और मुस्कुराते है उनकी नादानी पर हम प्रार्थना नही भगवान का खुदा का रब का शुक्रिया करते हैं कि हमें मुक्त कर दिया ऐसे दर्दनाक अपनों से और कसैले विषैले रिश्तों से इस बार ये बरसी अपनो की नही अपनेपन की है और रिश्तेदारों की नही बल्कि इस बार ये रिश्तों की बरसी है read more प्रेमचंद की 145 वीं जयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी by रवीन्द्र प्रभात बाराबंकी गरीब निर्धन एवं महिलाएं ही देश की संस्कृति के संवाहक रहे हैं प्रेमचंद के साहित्य में ऐसे ही पात्रों के माध्यम से संस्कृति को जीवित और संवर्धित करने का प्रयास है उक्त उद्गार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डा रामबहादुर मिश्र अध्यक्ष अवध भारती संस्थान ने वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय में प्रेमचंद की 145 वीं जयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए मुख्य वक्ता साहित्य समीक्षक डॉ विनयदास अध्यक्ष साहित्यकार समिति ने कहा साहित्य व्यापार का नहीं बल्कि समाज शोधन का माध्यम है साहित्य मशाल की तरह उजाला देते हुए मार्गदर्शन करने वाला होना चाहिए विचार गोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए डा कुमार पुष्पेंद्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के पात्र यथार्थ जीवन जीते नजर आते हैं इनका साहित्य मानवीय संवेदनाओं को उकेरते हुए पाखंडवाद पर करारी चोट करता है कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि सेवा निवृत्त उप पुलिस अधीक्षक साहित्यकार डा सत्या सिंह ने कहा कि अपने समय समाज में प्रचलित संस्कृतनिष्ठ हिंदी की साहित्य धारा के विपरीत आम जन की समझ में आने वाली सरल हिंदी का प्रयोग करके प्रेमचंद ने अभावग्रस्त व पाखंडवाद से जनित समस्याओं पर समाधान प्रस्तुत किए हैं प्राचार्य डॉ बलराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि अपने विपुल साहित्य में उठाए गए मानवीय जीवन के संवेदनशील विमर्शों के कारण प्रेमचंद प्रत्येक कालखंड में प्रासंगिक रहेंगे विचार गोष्ठी में महाविद्यालय की छात्राओं में अंशिका राजपूत ने मंत्र कहानी का पाठ किया तो संजना गुप्ता ने कहानी के तत्वों के आधार पर मंत्र कहानी की समीक्षा प्रस्तुत की अंशिका राज ने प्रेम चंद की एक कविता का सस्वर पाठ किया तथा अंजली रावत ने कहानी ईदगाह पर समीक्षात्मक परिचर्चा प्रस्तुत की अवध भारती संस्थान के सचिव प्रदीप सारंग के संयोजन व संचालन में संपन्न विचार गोष्ठी का शुभारंभ डा अंबरीष अम्बर की वाणी वंदना से हुआ विचार गोष्ठी में संतकवि बैजनाथ के वंशज प्रताप सिंह वर्मा सेवानिवृत्त जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव महाविद्यालय के चीफ प्राक्टर डा राम सुरेश शैक्षिक क्वार्डिनेटर डा दिनेश सिंह डा अर्चना यादव ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए विचार गोष्ठी में रमेश चंद्र रावत रामकिशुन यादव रत्नेश कुमार मंजू लता शर्मा विष्णु नारायण मिश्रा गुलाम नबी जितेंद्र कुमार राकेश कुमार डा सुरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे read more जिंदगी एक धागे का बंडल है by तरूण जोशी नारद started writing after years जिंदगी एक धागे का बंडल है इस बंडल मंे लिपटे हैं लम्हें कई परत दर परत खुलते जाते हैं इक छोर से दूजे छोर तक फिसलते हुए फिर एक चक्क्र पूरा होता है जैसे हुआ एक अध्याय पूरा अगले ही लम्हें मंे परत बदल जाती हैं जैसे कलेंडर में हो साल नया बस अनवरत चलता रहता है डोर की माला बढती जाती है और इक पल में जिंदगी की राह ये गुजर जाती है मैं सोच रहा हुं कि ये क्या हुआ समझ ना सका ये तू था मेरे खुदा हर पल तुने ये क्या करिश्मा दिखाया इस अदने पुतले का भी इक हस्ती बनाया सोच में में अपनी मगरूर था ना जाने किस बात का गुरूर था मगर तू तो मुझमें बसा रहा पर मुझे ना कोई इल्म ना सुबुर रहा रब मेरे मेरे जीवन के खेवन तेरा बचपन तेरा यौवन तेरा हर पल तेरी खुशियां हंसते हंसते लेंगे ये गम तुमने जो कुछ दिया स्वीकारा देखो चरखी अब भी घूम रही हैं धीरे धीरे आगे को बढ़ रही है हर पल लम्हें को लील रही हैं तुम इस तरह से हमें बदल रहें पल पल हम जीना सीख रहे और उस इक लम्हे के इंतजार में ये आखिरी कतरे तक पंहुच रहे अब ए खुदा बस छोड दे इस चकरी को उड जाने से पतंग को आजादी से अब ये रूह मेरी तेरी हो गई हमेशा के लिए मुक्त हो गया इन लम्हों की उलझन से चलो अब सोचते हैं कि क्या किया किससे क्या लिया औ क्या दिया जीवन का पूरा चक्र अब फिर से दोहराना है इस जन्म मंे भी मुझको अपनों को अपनाना है कुछ अपने जो रूठ गए है कुछ पीछे छूट गए हैं कुछ के पीछे जाते जाते हम कबके ही टूट गए हैं इस जीवन को क्या हम समझें समझना चाहें हम तुमकों ईश्वर जिस दिन समझ लिया तुझको नही भाएगी ये दुनिया नश्वर इस कृति को यहीं अधूरी छोडकर हम बढते हैं ईश्वर तुम सब लिखते हो हम तो केवल पढते हैं tarun joshi narad read more बाकू अजरबैजान में परिकल्पना की रजत जयंती यात्रा के सम्मान में विशेष आयोजन by parikalpnaa बाकू अजरबैजान में परिकल्पना की रजत जयंती यात्रा के सम्मान में एक विशेष आयोजन किया गया जिसमें परिकल्पना से जुड़े सम्मानित सदस्यों को विशेष सम्मान प्रदान किए गए इस अवसर पर परिकल्पना परिवार के 17 सदस्यों को रजत पदक प्रदान किया गया परिवार के आठ सदस्यों क्रमश श्री निर्भय नारायण गुप्ता डॉ सत्या सिंह श्री मती निशा मिश्रा डॉ प्रतिमा वर्मा डॉ बालकृष्ण पांडेय श्री मती नम्रता मिश्रा डॉ प्रमिला उपाध्याय और श्री मती सरोज सिंह को अंगवस्त्र रजत पदक मोमेंटो एवं मानपत्र के साथ परिकल्पना रजत जयंती सम्मान प्रदान किया गया इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पच्चीस हजार नकद सम्मान राशि एवं अंगवस्त्र रजत पदक मोमेंटो एवं मानपत्र के साथ परिकल्पना सम्मान प्रदान किया गया साथ हीं हिंदी पत्रिका रेवांत की ओर से परिकल्पना परिवार को विशेष रूप से इस उपलब्धि के लिए प्रशंसित किया गया वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रवीन्द्र प्रभात ने धन्यवाद ज्ञापित किया read more ब्रसेल्स में 13 वां अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव संपन्न by parikalpnaa दिनांक 20 05 2023 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के गोस्सित सभागार में 13 वां अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव संपन्न हुआ मुख्य अतिथि रहे बेल्जियम में हिन्दी के चर्चित ग़ज़लकार श्री कपिल कुमार इस अवसर पर प्रमुख साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित डॉ क्षमा सिसोदिया डॉ सुभासिनी शर्मा सचिंद्र नाथ मिश्र डॉ रवींद्र प्रभात आदि की एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें लोकार्पित हुई इस अवसर पर अवधी की लोक गायिका श्रीमती कुसुम वर्मा और प्रसिद्ध पत्रकार डॉ आर बी श्रीवास्तव विशेष अतिथि थे साथ ही विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे ब्रसेल्स के श्री संजय बाली और रेणु बाली इस अवसर पर हिन्दी की चर्चित कवियित्री डॉ चम्पा श्रीवास्तव को 25 हजार रुपए नकद शॉल स्मृति चिन्ह के साथ परिकल्पना शिखर सम्मान से नवाजा गया साथ ही प्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती कुसुम वर्मा और श्री बिमल बहुगुणा को परिकल्पना हिन्दी उत्सव सम्मान प्रदान किया गया वहीं 5100 रुपए नकद अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह के साथ डॉ क्षमा सिसोदिया सचिंद्रनाथ मिश्र और डॉ सुभाषिणी शर्मा को परिकल्पना सम्मान प्रदान किया गया लगभग दो दर्जन विद्वतजनों क्रमश डॉ अनिता श्रीवास्तव कल्पना अग्रवाल कविता सक्सेना डॉ सुकेश शर्मा डॉ पूनम सिंह प्रिया मिश्रा बृज किशोर अग्रवाल अनिल सक्सेना शुभम शर्मा आयुषी सिंह नंदिनी रावत माला चौबे शुभ चतुर्वेदी उर्विजा प्रभात आदि को परिकल्पना हिन्दी उत्सव यात्रा सम्मान प्रदान किया गया read more corona काल में rahul gandhi ने जारी किया modi सरकार का कैलेंडर by http sanadpatrika blogspot com read more मजदूरों के घर पहुंचने के बाद आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला सालिस्टर जनरल ने by http sanadpatrika blogspot com read more बिहार में स्वास्थ्य विभाग में रस्साकशी मंत्री कुछ आंकड़े देते हैं सचिव by http sanadpatrika blogspot com read more पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ सदस्यता लें संदेश atom सुर्खियाँ हिन् दी ब् लॉगिंग संबंधी पुस् तकों की अग्रिम बुकिंग से कमाई 15 अप्रैल 2011 के बाद पुस् तक की बुकिंग तो की जाएगी परंतु ब् लॉगर का विवरण पुस् तक में प्रकाशित होने की गारंटी नहीं है विशेष निर्णय के तहत आज 14 सितम् बर 2011 हिंदी दिवस से अगले वर्ष 2012 के हिंदी तक दिवस तक यदि पुस् तकें उपलब् ध रहेंगी तो दोनों पुस् तक प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक ascii iscii to unicode converter का नवीन संस्करण प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक वर्जन 2 2 5 0 प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक version 2 2 5 0 first and only software for the purp कुण्डलिनी जागरण की रहस्यमय प्रक्रिया कुण्डलिनी जागरण की रहस्यमय प्रक्रिया हरीश शहरी हरीश जी हमारे ब्लाग मित्र हैं और उन्होंने कुण्डलनी के जागरण की प्रक्रिया समझाने के ब् लॉगर स् नेह महासम् मेलन 12 सितम् बर 2009 शनिवार को जरूर पहुंचे अविनाश वाचस् पति व् यापक ब् यौरे की करें प्रतीक्षा प्रतीक्षा है जुड़ा जिससे वो व् यापक तो होगा ही व् यापक होना बिग होना ही है प् यार से मिलेंगे और प् यार ही प्रेम जनमेजय और सर्वत एम जमाल की पीड़ा हिन् दी साहित् य और सच् चे साहित् यकार की पीड़ा है यह रचनाविरोधी समय है जो सचमुच रचना को साधना की तरह जीते हैं जो अपनी पक्षधरता को जीवित रखना चाहते हैं उनको केवल बाहरी लोगों के षडयंत्रो दो दिन के लिए टिप् पणी लेखन अभियान लिंक दे जायें और टिप् पणी पायें संदर्भ वैशाखनंदन सम् मान प्रतियोगिता परिणाम जो टिप् पणियां देते हैं खुलकर उन् हें सम् मान मिलता है स् वर्णपर आज मैं बहुत खुश हूं मुझे इनाम मिला है सच कहूं नाम मिला है दो दिन ल महात् मा गांधी अंतरराष् ट्रीय हिंदी विश् वविद्यालय वर्धा से लौटकर हिन् दी ब् लॉगरों की एक महारैली का आयोजन देश की राजधानी दिल् ली के इंडिया गेट पर करें एक लिंक भी क्लिक कर के पढ़ने से छोड़ दिया तो समझिए इंडिया गेट की हिन् दी ब् लॉगर महारैली का भविष् य इससे भी दुष् कर है हिन् दी ब् लॉग आप अब कादम्बिनी मासिक पत्रिका ऑनलाईन पढ़ सकते हैं फिर मत कहिएगा खबर नहीं हुई http www livehindustan com kadambini 1 html कादम्बिनी आप जिसे चाहते हैं आप जिसे पसंद करते हैं आप जिसे पढ़ते हैं वो मैं हूं जी हां ब् लॉगर से ब् लॉगर मिले आगरा ब् लॉगर मिलन चित्र और चर्चा आ से ही आगरा और आ से ही आनंद और आ से ही आया आगरा में असीम आनंद आया मन आंगन में भरी दोपहरी में भी बरस उठी घनी स् नेह की छाया आगरा में इस ब आगरा ब् लॉगर मिलन प्रयास घर के भीतर देश बदलने का विश् वास 7 मई 2010 की रात में लिखचीत चैट पर माननीया बीना शर्मा जी ने जानना चाहा था कि मैं आगरा कब पहुंच रहा हूं मैंने बतलाया कि सुबह 5 बजे चलने की जी हां दुनिया गोल घूमती है feedjit live blog stats followers archive archive अगस्त 1 अगस्त 3 जुलाई 1 मार्च 1 मई 1 जुलाई 1 जून 1 मई 22 अप्रैल 13 फ़रवरी 1 दिसंबर 2 अगस्त 1 सितंबर 1 अगस्त 1 अक्टूबर 3 सितंबर 1 जुलाई 1 जून 1 मई 1 जनवरी 2 नवंबर 1 फ़रवरी 4 दिसंबर 3 नवंबर 5 अक्टूबर 1 सितंबर 2 जून 1 अप्रैल 2 मार्च 3 फ़रवरी 3 जनवरी 4 दिसंबर 9 नवंबर 12 अक्टूबर 6 सितंबर 3 जुलाई 12 जून 14 मई 7 अप्रैल 10 मार्च 4 फ़रवरी 6 जनवरी 9 दिसंबर 18 नवंबर 14 अक्टूबर 13 सितंबर 11 अगस्त 15 जुलाई 14 जून 18 मई 10 अप्रैल 18 मार्च 26 फ़रवरी 18 जनवरी 12 दिसंबर 14 नवंबर 23 अक्टूबर 13 सितंबर 19 अगस्त 21 जुलाई 22 जून 20 मई 39 अप्रैल 39 मार्च 43 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शहरी हरीश जी...
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